हाईकोर्ट ने अनूप अग्रवाल को लगाई कड़ी फटकार, कोर्ट ने की याचिका खारिज।

➡️ *अनूप अग्रवाल द्वारा पुलिस विवेचना में हस्तक्षेप व दबाव बनाने का किया गया प्रयास*➡️ *10–15 लोगों, जिनमें 10–12 अधिवक्ता व एक वर्तमान विधायक शामिल, के साथ कोतवाली पहुंचे थे*➡️ *अनूप अग्रवाल द्वारा विवेचक के समक्ष समूह में कथन दर्ज कराने पहुंचना न्यायालय ने बताया अनुचित*➡️ *हाईकोर्ट ने सभी मांगों को भ्रमात्मक व अस्पष्ट मानते हुए याचिका खारिज की*

ऊधम सिंह नगर। माननीय उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता अनूप अग्रवाल द्वारा अपने विरुद्ध दर्ज पांच मुकदमों के संबंध में विभिन्न प्रकार की राहत मांगी गई थी। याचिका में मुख्य रूप से सभी विवेचनाओं को सीबीआई अथवा अन्य एजेंसी को स्थानांतरित करने, दर्ज मुकदमों को अवैधानिक घोषित करने तथा सभी एफआईआर को निरस्त (क्वैश) करने की मांग की गई थी।सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने याचिका में उठाए गए बिंदुओं को क्रमशः अलग-अलग आधारों पर भ्रमात्मक, अंतर्विरोधी एवं स्पष्ट नहीं पाया। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता से संबंधित दो मामलों में विवेचक द्वारा आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है, जबकि अन्य मामले अभी विवेचनाधीन हैं।माननीय उच्च न्यायालय ने इस बात पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की कि याचिकाकर्ता ने न्यायालय द्वारा दी गई प्रोटेक्शन का दुरुपयोग किया। अनूप अग्रवाल 15–20 लोगों के समूह के साथ, जिसमें 10–12 अधिवक्ता एवं एक वर्तमान विधायक भी शामिल थे, कोतवाली पहुंचकर विवेचक के समक्ष अपने कथन दर्ज कराने पहुंचे थे , जिसे न्यायालय ने पूर्णतः अनुचित ठहराया।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विवेचना प्रक्रिया में किसी भी व्यक्ति द्वारा इस प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। अंततः सभी तथ्यों को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई।


