म्यूल अकाउंट्स पर एसटीएफ उत्तराखण्ड का बड़ा प्रहार – दो दिनों की ताबड़तोड़ कार्यवाही में 04 मुकदमे दर्ज, संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा।

*रुद्रपुर। **“म्यूल अकाउंट्स पर एसटीएफ उत्तराखण्ड का बड़ा प्रहार; दो दिनों की ताबड़तोड़ कार्यवाही में 04 मुकदमे दर्ज, संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा”* *अब तक एक माह में म्यूल अकाउंट्स पर 10 नामजद सहित कई अज्ञात के विरुद्ध 06 अभियोग दर्ज कर की जा रही है विधिक कार्यवाही*

*━━━━━━━━━━**🔹 मुख्य बिंदु:**━━━━━━━━━━**● एसटीएफ/साइबर क्राइम द्वारा म्यूल अकाउंट होल्डर्स और एजेंटों के विरुद्ध अब तक कुल 06 मुकदमे पंजीकृत कराकर 10 अभियुक्तों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्यवाही की जा चुकी है, और साइबर अपराधियों के खिलाफ यह कड़ा अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।**● आर्थिक रूप से कमजोर एवं मजदूर वर्ग के लोगों को लालच देकर खुलवाए जा रहे थे बैंक खाते; बिहार, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित देश के कई राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों की रकम इन खातों में हो रही थी ट्रांसफर।**● डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, शेयर मार्केट फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड और टास्क फ्रॉड के माध्यम से देश की जनता से ठगे गए करोड़ों रुपयों की लेयरिंग (Layering) के लिए इस्तेमाल हो रहे थे ये म्यूल अकाउंट्स।**● बैंकिंग अभिलेखों, KYC दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और गहन ‘Money Trail Analysis’ के आधार पर स्पेशल टास्क फोर्स ने किया सिंडिकेट का भंडाफोड़।**● “साइबर अपराधियों को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या सिम कार्ड किराए पर देने वाले अथवा लालच में आकर दूसरों के नाम पर खाते खुलवाने वाले तत्वों पर एसटीएफ करेगी कठोरतम कानूनी कार्यवाही” — एसएसपी, एसटीएफ।**━━━━━━━━━━**विस्तृत विवरण:**━━━━━━━━━━* *वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ उत्तराखण्ड द्वारा साइबर अपराधों में प्रयुक्त होने वाले संदिग्ध बैंक खातों (Mule Accounts) के विरुद्ध एक व्यापक और प्रभावी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में एसटीएफ व साइबर टीम को संदिग्ध खातों के सत्यापन एवं विस्तृत वित्तीय विश्लेषण के निर्देश दिए गए थे।**एसटीएफ टीम द्वारा विगत कई सप्ताहों से NCRP Portal, Samanvaya Portal, CFCFRMS, I4C Inputs, बैंकिंग अभिलेखों, KYC दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों एवं Money Trail Analysis का गहन परीक्षण किया जा रहा था। इस तकनीकी व वित्तीय जांच में साइबर अपराधियों को म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले एक अत्यंत संगठित गिरोह का संचालित होना प्रकाश में आया है।**इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा लगातार बड़ी कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। इस प्रहार के अंतर्गत, आज (08 जून) संदिग्ध खातों के सत्यापन के आधार पर थाना साइबर क्राइम, देहरादून व कुमाऊँ में 03 एफआईआर (FIR) दर्ज कर 04 अभियुक्तों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया गया। मुख्य नामजद अभियुक्तों तथा उनके सिंडिकेट से जुड़े अन्य अज्ञात साथियों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही शुरू कर दी गई है।**विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि एसटीएफ/साइबर क्राइम द्वारा म्यूल अकाउंट्स के इस पूरे संगठित तंत्र के विरुद्ध अभी तक कुल 06 मुकदमे पंजीकृत कराकर 10 अभियुक्तों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जा चुकी है। पुलिस महानिदेशक महोदय के स्पष्ट निर्देशानुसार संदिग्ध खातों की री-वेरिफिकेशन और इन वास्तविक अपराधियों की धरपकड़ का यह सिलसिला आगे भी लगातार जारी रहेगा।**━━━━━━━━━━**अपराध का तरीका (Modus Operandi):**━━━━━━━━━━**जांच के दौरान यह तथ्य सामने आए हैं कि अभियुक्तगणों द्वारा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर एवं मजदूर वर्ग के लोगों को सरकारी योजनाओं में लाभ दिलाने या पैसों का प्रलोभन देकर उनके नाम से नए बैंक खाते खुलवाए गए अथवा उनके पूर्व से संचालित खातों की बैंकिंग सुविधाएं (नेट बैंकिंग, चेकबुक, एटीएम) प्राप्त कर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराई जा रही थीं। उक्त खातों के विरुद्ध NCRP एवं Samanvaya Portal पर बिहार, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की गंभीर शिकायतें अंकित हैं। इन संबंधित खातों में डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी (Investment Fraud), शेयर मार्केट फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड, टास्क फ्रॉड एवं अन्य साइबर अपराधों से अर्जित करोड़ों रुपये की काली कमाई प्राप्त कर उसे छिपाने, स्थानांतरित करने और वास्तविक अपराधियों तक पहुँचाने (Layering) का कार्य किया जा रहा था।**━━━━━━━━━━**विधिक कार्यवाही:**━━━━━━━━━━**प्रारंभिक जांच, स्थानीय सत्यापन और अकाट्य डिजिटल व वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून व कुमाऊं पर दर्ज इन मुकदमों के अंतर्गत धारा 112(2), 318(4), 319(2), 336(2), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 की धारा 66C एवं 66D के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कराया गया है। मामले में नामजद आरोपियों पर यथाशीघ्र गिरफ्तारी व सख्त वैधानिक कार्यवाही के साथ ही, इस साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े अन्य संदिग्ध व्यक्तियों, बैंक खातों और संदिग्ध बैंक कर्मियों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है।**━━━━━━━━━━**आमजन हेतु अपील (STF Alert):**━━━━━━━━━━**एसटीएफ उत्तराखण्ड आमजन से पुरजोर अपील करता है कि किसी भी अनजान या परिचित व्यक्ति के कहने पर अपना bank खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड अथवा इंटरनेट बैंकिंग सुविधाएं (ID/Password) किसी अन्य को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध न कराएं। कमीशन, लालच अथवा सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराना भी बेहद गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे खातों में फ्रॉड का पैसा आते ही खाताधारक के विरुद्ध भी उतनी ही कठोर कानूनी कार्यवाही की जाती है जितनी मुख्य अपराधी के खिलाफ। सजग रहें, साइबर अपराधियों का हिस्सा बनने से बचें।*


