खनन विभाग ने फरवरी 2026 तक ही 965 करोड़ रुपये का राजस्व किया अर्जित।

देहरादून / रुद्रपुर। खनन निदेशक राजपाल लेघा को खनन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य पर इंडियाज आनेस्ट इंडिपेन्डेंस आनर मिलने पर कुमाऊॅ स्टोन क्रशर एसोसिएशन एवं सितारगंज स्टोन क्रशर एसोसिएशन ने जताई खुशी। देहरादून। अक्सर कई किस्से खूब सुनने क़ो मिले होंगे कई अवैध खनन से खूबजोरशोर से काली कमाई की चल रही हैं और खनन विभाग समेत अन्य विभाग पर अंगुली उठती रही हैं… मगर इस बार वैध खनन से राज्य की खूब झोली भर रही है और उत्तराखंड के खनन विभाग ने राजस्व प्राप्ति के मामले में नया इतिहास रचते हुए अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए वित्त विभाग द्वारा निर्धारित 950 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले खनन विभाग ने फरवरी 2026 तक ही 965 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर लिया है।

उधर, उत्तराखण्ड के खनन निदेशक राजपाल लेघा को खनन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य पर इंडियाज आनेस्ट इंडिपेन्डेंस आनर मिलने पर कुमाऊॅ स्टोन क्रशर एसोसिएशन एवं सितारगंज स्टोन क्रशर एसोसिएशन ने खुशी जताई है। एसोशिएसन के सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड में खनन व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार के लिए किये जा रहे प्रयासों को रास्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में राजपाल लेखा का उल्लेखनीय योगदान रहा है। उनके नेतृत्व में में खनन विभाग ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। जिनसे प्रदेश की खनन व्यवस्था सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनी है। उनके द्वारा ई-गर्वेनेसिंग डिजिटलाईजेशन होने से व्यापार में इजाफा हुआ है और राजस्व ग्रोथ बढी है। उनके द्वारा अवैध खनन पर नियंत्रण प्रक्रियाओं में सुधार और आधुनिक तकनीकी के उपयोग से खनन में सकारात्मक बदलाव हुए है। जिससे राजस्व में वृद्धि के साथ साथ व्यवसायियों को भी लाभ मिल रहा है। उनके इन सुधारों से पूर्व में आधे से अधिक क्रेशर जो बन्द हो गये थे।अब पुनः चालू हो गए है।वही विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही तय लक्ष्य को पार कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार मौजूदा रफ्तार को देखते हुए वित्तीय वर्ष के अंत तक यह राजस्व लगभग 1100 करोड रुपयं तक पहंचने की संभावना है। यह उपर्लाब्धे राज्य में खनन प्रबंधन में हुए सुधारों और तकनीकी निगरानी प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम मानी जा रही है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी खनन विभाग ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। उस वर्ष विभाग को 875 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था, जिसके मूकाबले विभाग ने 1041 करोड रुपये का राजस्व अर्जित किया था। यह उस समय तक का सर्वाधिक राजस्व था, जिसे अब चालू वित्तीय वर्ष में और बेहतर किया जा रहा है।खनन विभाग की इस उपलब्धि में दो प्रमुख डिजिटल परियोजनाओं की अहम भूमिका रही है। विभाग द्वारा शुरू किए गए MDTSS (माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम) और ई-रवन्ना सिक्योरिटी पेपर जैसे आधुनिक सिस्टमों ने अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है। इन तकनीकी उपायों के कारण न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि राजस्व में भी पिछले वर्षों की तुलना में लगभग चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इन नवाचारों और प्रभावी प्रबंधन को देखते हुए खनन विभाग की दोनों परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड 2025 (Skoch Award) के लिए भी चुना गया है।यह उपलब्धि उत्तराखण्ड में खनन क्षेत्र में तकनीक आधारित सुधारों और बेहतर प्रशासनिक कार्यप्रणाली का प्रमाण मानी जा रही है।राज्य सरकार का कहना है कि आगे भी अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई और तकनीकी निगरानी को और मजबूत किया जाएगा, जिससे राजस्व में लगातार वृद्धि के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।


