खनन निदेशक राजपाल लेघा का वाहन स्वामियों को बड़ा राहत भरा फैसला, अब ई-रवन्ना की समयसीमा खत्म होने पर मिलेगी मदद!
जाम, नो-एंट्री, VVIP मूवमेंट या वाहन खराब होने से ई-रवन्ना की वैधता समाप्त होने की समस्या पर निदेशक गंभीर, दो हेल्पलाइन नंबर जारी; व्हाट्सऐप पर फोटो और लोकेशन भेजकर दर्ज करा सकेंगे सूचना

देहरादून। उत्तराखंड में खनिज परिवहन से जुड़े वाहन स्वामियों की लंबे समय से सामने आ रही ई-रवन्ना की समस्या को लेकर भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के निदेशक राजपाल लेघा ने महत्वपूर्ण पहल की है। अब यातायात जाम, नो-एंट्री, वीवीआईपी मूवमेंट अथवा वाहन खराब होने जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में ई-रवन्ना की वैधता समाप्त होने पर वाहन स्वामी सीधे विभागीय हेल्पलाइन पर अपनी समस्या दर्ज करा सकेंगे।गुरुवार, 08 अक्टूबर को निदेशक राजपाल लेघा की अध्यक्षता में MDTSS योजना के अंतर्गत आयोजित समीक्षा बैठक में खनिज वाहन स्वामियों की परेशानियों और डिजिटल चालान व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
राजपाल लेघा की पहल, वाहन स्वामियों को अनावश्यक ई-चालान से राहत दिलाने की कोशिशखनिज परिवहन के दौरान कई बार वाहन निर्धारित समय में गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते। सड़क पर लंबा जाम, नो-एंट्री, वीवीआईपी मूवमेंट या तकनीकी खराबी के कारण ई-रवन्ना की वैधता अवधि समाप्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में वाहन स्वामियों को ई-चालान की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसी परेशानी को देखते हुए खनन निदेशक राजपाल लेघा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा के बाद नई हेल्पलाइन व्यवस्था शुरू की गई है, ताकि आकस्मिक परिस्थितियों की सूचना समय रहते विभाग तक पहुंच सके।
खनिज वाहन स्वामियों के लिए दो हेल्पलाइन नंबर जारी खनन विभाग हेल्पलाइनव्हाट्सऐप सुविधा 8192802345, 8192802320 वाहन की नंबर प्लेट की फोटो और GPS लोकेशन व्हाट्सऐप पर भेजकर सूचना दर्ज कराएं।अवैध खनन की शिकायत भी इन्हीं नंबरों पर खनन निदेशालय की इस नई व्यवस्था का लाभ केवल वाहन स्वामियों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि अवैध खनन, अवैध खनिज परिवहन और अवैध भंडारण से संबंधित शिकायतें भी इन्हीं हेल्पलाइन नंबरों पर दर्ज कराई जा सकेंगी।इस पहल का उद्देश्य खनिज परिवहन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना, अनावश्यक ई-चालान की समस्या कम करना और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था विकसित करना है।हालांकि, हेल्पलाइन पर सूचना दर्ज कराने का अर्थ ई-चालान स्वतः निरस्त होना नहीं है। विभागीय सत्यापन और लागू नियमों के अनुसार ही राहत निर्धारित होगी। खनन निदेशक राजपाल लेघा की इस पहल से खनिज वाहन स्वामियों को अपनी वास्तविक परेशानी सीधे विभाग तक पहुंचाने का नया माध्यम मिला है। अब देखना होगा कि हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का कितनी तेजी से समाधान होता है।
